मुस्कुराता मेघालय: शुरूआती १००० दिवस और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास (ECD) को सशक्त बनाने की दिशा में पूर्वोत्तर की ओर बढ़ते कदम

शिलांग/मेघालय: प्रारंभिक बाल्यावस्था (०-६ वर्ष) किसी भी समाज के मानव विकास की नींव होती है। बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास में निवेश न केवल उनके भविष्य को सुरक्षित करता है, बल्कि राज्य के समग्र विकास को भी गति देता है। इसी दृष्टि से ICLEI साउथ एशिया द्वारा दिसंबर २०२५ से मेघालय अर्ली चाइल्डहुड डेवलपमेंट मिशन (MECDM) के अंतर्गत, वेन लीयर फाउंडेशन (VLF) के सहयोग से मेघालय में एक समग्र और नवाचार-आधारित प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास (ECD) परियोजना पर कार्य की शुरुआत की गयी।

यह परियोजना नीति (पॉलिसी) समर्थन, व्यवहारगत बदलावों, सेवा-प्रणाली को मज़बूत करने और राज्य स्तर से लेकर ज़मीनी स्तर तक के कार्मिकों और कार्यकर्ताओं के क्षमतावर्धन के माध्यम से बच्चों, देखभालकर्ताओं तथा फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के लिए एक सक्षम और सहायक वातावरण विकसित करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेघालय का प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, स्वस्थ और पोषक वातावरण में अपनी पूर्ण क्षमता तक विकसित हो सके।

शुरूआती १००० दिवस पर पॉलिसी से समुदाय स्तर तक रहेगा फोकस: इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य स्तर से लेकर समुदाय स्तर तक प्रारम्भिक बाल्यावस्था विकास (ECD) को एकीकृत, साक्ष्य-आधारित और व्यवहार-केंद्रित दृष्टिकोण से सुदृढ़ करना है। परियोजना बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्षों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों; नीति, संस्थागत क्षमता, सेवाओं की गुणवत्ता, अभिभावकीय व्यवहार और ज्ञान की उपलब्धता आदि पर एक साथ कार्य करेगी। इस दौरान शुरूआती १००० दिवस, गृह आधारित नवजात शिशु तथा छोटे बच्चों की देखभाल, बाल मित्र ढांचागत विकास, क्षमता वर्धन आदि पर टीम अपना फोकस रखेगी। इस दौरान मेघालय के दो जिलों, ईस्ट खासी हिल्स एवं वेस्ट गारो हिल्स पर पायलट फेज में अपने अनुभवों को ज़मीन पर रहेगा। साथ ही साथ, बच्चों तथा समुदाय के लिए सभी शिक्षण एवं जानकारी प्रेषण सामग्री को स्थानीय जनजातीय भाषाओं में अनुवादित किया जायेगा।

ICLEI साउथ एशिया, शहरी एवं सामाजिक विकास में अपने व्यापक अनुभव के साथ, इस परियोजना में तकनीकी मार्गदर्शन, वैश्विक एवं राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं और साक्ष्य-आधारित योजना को आगे बढ़ाएगा तथा समुदाय और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और सहभागिता को सशक्त बनाएगा वहीँ MECDM के बैनर तले राज्य स्तर पर नेतृत्व और अभिसरण सुनिश्चित करेगा।

पॉलिसी स्तर पर क्रियान्वयन को सरल करने की दिशा में कदम: राज्य की मौजूदा नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों को प्रारंभिक बाल्यावस्था के दृष्टिकोण से और अधिक सशक्त बनाने के दिशा में परियोजना टीम काम करेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) तथा राष्ट्रीय केरिक्युलम फ्रेमवर्क फॉर फाउंडेशननल स्टेज (NCF) को मेघालय में बेहतर रूप से क्रियान्वयन तथा सहयोग के लिए भी टीम काम करेगी। मेघालय राज्य में MECDM अपने स्तर पर भी केरिक्युलम फ्रेमवर्क पर कार्य कर रही है, जिस में परियोजना द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया जायेगा, ताकि इन्हें ज़मीन पर ठीक से लागू किया जा सके। इसी के साथ राज्य प्रारम्भिक शिक्षा नीति में भी तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी। इस से प्रारंभिक बाल्यावस्था से सम्बंधित नीतिगत ढांचे और दिशा निर्देशों को मज़बूत करने, विभिन्न विभागों (स्वास्थ्य, बाल विकास, शिक्षा एवं सोश्यल वेलफेयर आदि) के बीच बेहतर अभिसरण के साथ साथ अभिभावकों, देखभालकर्ताओं और समुदाय के लिए सामाजिक व्यवहार परिवर्तन संचार (SBCC) रणनीतियाँ विकसित की जा सकेगी ताकि पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक सीख और सकारात्मक पालन-पोषण को बढ़ावा मिले।

लाईटहाउस ECD केन्द्रों का विकास: परियोजना के तहत चयनित आंगनवाड़ी/बाल विकास केंद्रों को ‘लाइट-हाउस’ या मॉडल ECD केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। ये केंद्र गुणवत्तापूर्ण सेवाओं, सुरक्षित और बाल-अनुकूल अवसंरचना के उदाहरण प्रस्तुत करेंगे, साथ ही प्रारंभिक सीख, खेल-आधारित गतिविधियों, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के एकीकृत मॉडल को प्रदर्शित करेंगे। ये केंद्र राज्य स्तर पर अन्य केंद्रों और जिलों के लिए सीख और विस्तार (replication) के केंद्र के रूप में कार्य करेंगे।

स्थानीय भाषाओं में पालन १००० मोबाइल एप तथा २४x७ हेल्पलाइन पर होगा काम: परियोजना टीम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वेनलीयर फाउंडेशन के सहयोग से निर्मित “पालन १००० मोबाइल एप” को स्थानीय जनजातीय भाषाओं- खासी, गारो तथा पनार में अनुवादित करेगी, ताकि उन्हें ग्रामीण स्तर पर आसानी से पहुँचाया जा सके; वहीँ विभाग के सहयोग से २४x७ चलने वाली एक हेल्प लाइन को भी आरम्भ किया जायेगा, जो जच्चा- बच्चा तथा प्रारम्भिक बाल विकास से जुड़े तमाम आयामों, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा एवं गृह आधारित देखभाल के विकल्पों पर त्वरित सहयोग कर सकेगी।

परियोजना का एक उद्देश्य फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं, सरकारी अधिकारियों और समुदाय के प्रमुख हितधारकों की क्षमता को सुदृढ़ करना है। इसके अंतर्गत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा, एएनएम और अन्य फील्ड-स्तरीय कर्मियों के लिए प्रशिक्षण; जिला और राज्य स्तर के अधिकारियों के लिए ECD-संवेदनशील योजना और निगरानी पर क्षमता निर्माण; समुदाय-आधारित संगठनों और स्वयंसेवकों को बच्चों के विकास के पक्षधर के रूप में सशक्त बनाना तथा देखभालकर्ताओं को गृह आधारित शिशु देखभाल के लिए क्षमतावर्धन आदि शामिल है।

इसी के साथ परियोजना के दौरान विभिन्न शोध, आकलन और अनुभवों के आधार पर दस्तावेजीकरण किए जाएंगे, जिनमें ECD पर नीति संक्षेप (policy briefs), मार्गदर्शिका और टूलकिट का निर्माण और फिल्ड स्तर तक उन्हें लागू करने; अच्छी प्रथाओं और केस स्टडी का दस्तावेज़ीकरण; कार्यशालाओं, संवादों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ज्ञान का व्यापक प्रसार आदि पर भी ध्यान केन्द्रित किया जायेगा, ताकि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ECD से जुड़े हितधारकों को लाभ मिल सके।

इस बहुआयामी पहल से मेघालय में प्रारंभिक बाल्यावस्था सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच और प्रभावशीलता में सुधार होने की अपेक्षा है। परियोजना बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और देखभाल से जुड़े परिणामों को बेहतर बनाएगी तथा समुदाय में सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करेगी।

परियोजना टीम, वेन लीयर फाउंडेशन अधिकारियों के साथ

मुख्यमंत्री के समक्ष परियोजना के उद्देश्यों का प्रस्तुतिकरण: दिसंबर दूसरे सप्ताह में मेघालय के माननीय मुख्यमंत्री श्री कौनराड संगमा, श्री संपत कुमार (प्रधान सचिव- सामुदायिक एवं ग्रामीण विकास तथा और विकास आयुक्त), सुश्री रुश्दा मजीद (चीफ प्रोग्राम ऑफिसर (ग्लोबल)- वेन लीयर फाउंडेशन) की गरिमामयी उपस्थिति में वेन लीयर फाउंडेशन के कंट्री रीप्रेजेंटेटीव श्री प्रकाश पाल ने परियोजना के उद्देश्यों और रुपरेखा को प्रस्तुत किया। इस दौरान MECDM के अंतर्गत परियोजना के अपेक्षित परिणामों पर भी चर्चा हुई।

ICLEI साउथ एशिया, MECDM और VLF की यह साझेदारी मेघालय को प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी और अनुकरणीय राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल आज के बच्चों में निवेश है, बल्कि राज्य के भविष्य में भी एक सशक्त निवेश है। उल्लेखनीय है कि इस से पूर्व अर्बन95 परियोजना के अंतर्गत राजस्थान के उदयपुर में ICLEI साउथ एशिया ने VLF के साथ मिलकर प्रारम्भिक बाल विकास के क्षेत्र में सफलता के आयाम रचे थे, तत्पश्चात मेघालय राज्य स्तर पर इस परियोजना की शुरुआत हुई है।

आलेख: ओम (विषय विशेषज्ञ- प्रारम्भिक बाल्यावस्था विकास),

ICLEI साउथ एशिया, शिलांग

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