जलवायु परिवर्तन के कारण शहरी क्षेत्रों में मौसम में असामान्य बदलाव आ रहे हैं, जैसे अत्यधिक गर्मी, अचानक बारिश और बाढ़। ये बदलाव खासकर गरीब और कमजोर वर्गों, विशेष रूप से छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं। इन वर्गों को जलजनित बीमारियाँ, गर्मी से संबंधित समस्याएँ और कुपोषण का सामना करना पड़ता है, जो उनके स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
इसके अतिरिक्त, बाढ़ और चरम मौसम के दौरान बच्चों की शिक्षा और विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। आंगनवाड़ी केंद्रों और अन्य संस्थाओं की बंदी से बच्चों को महत्वपूर्ण सीखने और सामाजिक अवसरों से वंचित होना पड़ता है, जिससे उनके समग्र विकास में देरी हो सकती है।
इस स्थिति में, शहरों में जलवायु लचीलापन बढ़ाने के लिए तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है, ताकि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा और सुरक्षा मिल सके।